
राज्य के सरकारी स्कूलों के पहली से लेकर 12वीं तक के करीब चार लाख शिक्षकों की ढाई माह से अधिक पुरानी अनिश्चितकालीन हड़ताल सोमवार शाम समाप्त हो गयी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हस्तक्षेप और उनके निर्देश पर शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव आरके महाजन के साथ बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक ब्रजनंदन शर्मा और बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष केदारनाथ पांडेय की वार्ता के बाद दोनों संगठनों ने अपनी-अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल समाप्त करने की घोषणा की।
वार्ता में मुख्य रूप से चार बातें तय हुईं। शिक्षक संघों की मांगों पर कोरोना महामारी के बाद स्थिति सामान्य होने पर वार्ता की जाएगी। हड़ताल अवधि में शिक्षकों पर सरकार द्वारा की गयी निलंबन, प्राथमिकी आदि की अनुशासनात्मक कार्रवाई (तोड़-फोड़, हिंसा छोड़) वापस ली जाएगी। हड़ताल अवधि में सरकार का ‘नो वर्क नो पे’ का सिद्धांत अक्षुण्ण रखते हुए इस अवधि को छुट्टियों में समंजित किया जाएगा। समंजन के उपरांत इस अवधि का भुगतान हड़ताली शिक्षकों को किया जाएगा। विभाग के प्रवक्ता अमित कुमार ने बताया कि तय हुआ कि कोविद-19 की रोकथाम के लिए सरकार द्वारा किये जा रहे प्रयासों में शिक्षकों का भी सहयोग मिलेगा।
गौरतलब है कि समान वेतन, सेवाशर्त समेत अन्य मांगों को लेकर बिहार राज्य शिक्षक संघर्ष समन्वय समिति के आह्वान पर 17 फरवरी से जबकि वेतन विसंगति और सेवाशर्त समेत अन्य मांगों को लेकर बिहार माध्यमिक शिक्षक संघ की अपील पर राज्यभर के शिक्षक 25 फरवरी से हड़ताल पर थे। सोमवार को समन्वय समिति की हड़ताल का 78वां दिन जबकि माध्यमिक संघ की हड़ताल का 70वां दिन था। संघ के नेताओं संग सोमवार दोपहर श्री महाजन के कक्ष में हुई वार्ता में सोशल डिस्टेंसिंग का भी ख्याल रखा गया। पहले माध्यमिक और फिर समन्वय समिति के नेता को बुलाया गया। शिक्षा मंत्री भी फोन से जुट़े रहे। हड़ताल से वापस लौटने के शिक्षक संघों के निर्णय पर शिक्षा मंत्री ने उन्हें बधाई दी। देर से ही सही कोरोना संक्रमण से उत्पन्न स्थिति को समझा और काम पर लौटे।