आंध्र प्रदेश के समुद्री तट से दागी गई इस मिसाइल की मारक क्षमता 3,500 किलोमीटर है. यह मिसाइल पनडुब्बी से दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम है. इस मिसाइल का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने किया है.

भारत ने हाल ही में K-4 परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया. भारत ने 19 जनवरी 2020 को परमाणु हमला करने में सक्षम बैलिस्टिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया है. इस मिसाइल को नौसेना की स्वदेशी आईएनएस अरिहंत-श्रेणी की परमाणु-संचालित पनडुब्बी पर तैनात किया जाएगा.
आंध्र प्रदेश के समुद्री तट से दागी गई इस मिसाइल की मारक क्षमता 3,500 किलोमीटर है. यह मिसाइल पनडुब्बी से दुश्मन के ठिकानों को निशाना बनाने में सक्षम है. फिलहाल नौसेना के पास आईएनएस अरिहंत ही एकमात्र ऐसी पनडुब्बी है, जो परमाणु क्षमता से लैस है. इस मिसाइल का विकास रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने किया है.
इस मिसाइल की खासियत
• K-4 परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल को भारतीय नौसेना के स्वदेशी आईएनएस अरिहंत-श्रेणी के परमाणु-संचालित पनडुब्बियों पर तैनात किया जाएगा.
• इस मिसाइल का परीक्षण ओडिशा के तट पर चांदीपुर रेंज में किया गया. यह मिसाइल जमीन से हवा में सटीक निशाने को भेदने में सक्षम है.
• इसी मिसाइल की तरह पिनाका मिसाइल का भी सफल परीक्षण किया जा चुका है. अर्टिलरी मिसाइल सिस्टम 'पिनाका' से 90 किलोमीटर की दूरी तक सटीक निशाना लगाया जा सकता है.
• परमाणु हमला करने में सक्षम पनडुब्बियों पर तैनात करने से पहले इस मिसाइल के कई और परीक्षणों से गुजरने की संभावना है. मिसाइल का परीक्षण दिन में समुद्र के अंदर मौजूद प्लेटफॉर्म से किया गया.
• के-4 पानी के नीचे चलने वाली उन दो स्वदेशी मिसाइल में से एक है, जिन्हें समुद्री ताकत बढ़ाने हेतु तैयार किया गया है. के-4 के अतिरिक्त दूसरी मिसाइल बीओ-5 है, जिसकी मारक क्षमता लगभग 700 किलोमीटर है.
• के-4 बैलिस्टिक मिसाइल को रफ्तार की वजह से कोई भी एंटी-बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम ट्रैक नहीं कर सकता.
बैलिस्टिक मिसाइल क्या है?
तकनीकी दृष्टि से बैलिस्टिक मिसाइल उस प्रक्षेपास्त्र को कहते हैं जिसका प्रक्षेपण पथ सब ऑर्बिटल बैलिस्टिक पथ होता है. इसका उपयोग किसी हथियार (नाभिकीय अस्त्र) को किसी पूर्व निर्धारित लक्ष्य पर दागने हेतु किया जाता है. यह मिसाइल प्रक्षेपण के प्रारंभिक स्तर पर ही गाइड की जाती है. इसके बाद का पथ आर्बिटल मैकेनिक के सिद्धांतों पर एवं बैलेस्टिक सिद्धांतों से निर्धारित होता है. इसे अभी तक रासायनिक रॉकेट इंजन से छोड़ा जाता था. सबसे पहला बैलिस्टिक प्रक्षेपास्त्र (मिसाइल) A-4 था. इसे सामान्यत V-2 रोकेट के नाम से भी जाना जाता है. इस मिसाइल को नाज़ी जर्मनी ने साल 1930 से साल 1940 के मध्य में रोकेट वैज्ञानिक वेर्न्हेर वॉन ब्राउन की देखरेख में विकसित किया था.
भारत विश्व के छह देशों में शामिल
भारत जमीन, हवा और पानी के अंदर से परमाणु मिसाइल को दागने की क्षमता रखने वाले विश्व के महज छह देशों में शामिल है. यह क्षमता भारत के अतिरिक्त अमेरिका, रूस, फ्रांस, ब्रिटेन और चीन के पास है.