लॉकडाउन के दौरान भारत में वर्क फ्रॉम होम का चलन बहुत तेजी से बढ़ा है जिसके कारण वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग एप काफी तेजी से पॉपुलर हुए हैं.इसी दिशा में भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय द्वारा एक बेस्ट वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग एप बनाने के चैलेंज शुरू किया गया है जिसके विजेता को एक करोड़ रुपये पुरस्कार के तौर पर दिए जायेंगे.

भारत में कोरोना वायरस के संक्रमण को कम करने के लिए 25 मार्च से देशव्यापी तालाबंदी शुरू हुई थी. इसके कारण कॉर्पोरेट कंपनियों और यहां तक कि शैक्षणिक संस्थानों ने अपने काम को जारी रखने और बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने के लिए रचनात्मक तरीके अपनाए. उनमें से, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप, विशेष रूप से ज़ूम एप रातों-रात लोकप्रिय हो गए थे.
लेकिन अब पता चला है कि ज़ूम एप लोगों का डेटा बेच रहा है जिससे लोगों की निजता के अधिकार का उल्लंघन हुआ है. इसी कारण भारत सरकार ने ज़ूम एप के प्रयोग को अपने कार्यालयों में इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है और भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने के चैलेंज जारी करते हुए कहा है कि जो टीम 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के लिए एक अच्छा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग समाधान विकसित करेगी उसको 1 करोड़ रुपये का नकद पुरस्कार दिया जायेगा.
आइये इस लेख में इस चैलेंज के बारे में विस्तार से जानते हैं;
भारत सरकार के इनोवेशन चैलेंज को जीतने के लिए आवेदकों को तीन चरणों से गुजरना होगा:
स्टेज 1: सबसे पहले, टीम को अपने ऐप कांसेप्ट के बारे में एक विस्तृत रिपोर्ट के साथ आना होगा जिसमें विशेषताएं भी शामिल होंगीं. सभी प्रतियोगियों में से, शीर्ष दस टीमों का चयन किया जाएगा और ऐप विकास के साथ आगे बढ़ने के लिए सीड फण्ड के रूप में सभी को 5 लाख रुपये से सम्मानित किया जाएगा.
स्टेज 2: इसके बाद चुनी गयी 10 टीमों को भारत सरकार द्वारा चयनित जूरी के सामने अपना प्रोटोटाइप ऐप पेश करना होगा. उनमें से, तीन ऐप डेवलपर टीमों का चयन किया जाएगा और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग ऐप को पूरा करने के लिए 20 लाख रुपये का फंड भी मिलेगा.
चरण 3: अंत में, भारत सरकार विजेता टीम का चयन करेगी और उसे 1 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि देगी. इसके अतिरिक्त, टीम सदस्यों को इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय (MeitY) द्वारा हस्ताक्षरित आधिकारिक प्रमाण पत्र भी दिए जायेंगे.
विजेता वीडियो कॉन्फ्रेंस ऐप का उपयोग केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा एक वर्ष के लिए किया जाएगा और इसके अलावा, डेवलपर टीम को संचालन और रखरखाव के लिए प्रति वर्ष 10 लाख रुपये का कॉन्ट्रैक्ट भी मिलेगा.
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप्लिकेशन में नीचे लिखी सभी विशेषताएं होनी चाहिए:-
1. वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग एप्लिकेशन सभी वीडियो रेजोल्यूशन और ऑडियो गुणवत्ता को सपोर्ट करना चाहिए, और कम और उच्च नेटवर्क की स्थिति में भी काम करना चाहिए.
2. ऑडियो / वीडियो रिकॉर्डिंग की सुविधा होनी चाहिए.
3. इसे ऑपरेट होने के लिए किसी भी बाहरी हार्डवेयर के उपयोग पर निर्भरता नहीं होना चाहिए.
4. इसे किसी भी डिवाइस पर काम करना चाहिए जैसे मोबाइल और डेस्कटॉप इत्यादि पर.
5. इसमें स्क्रीन / फाइल-शेयरिंग क्षमताएं/सुविधाएँ भी होनी चाहिए.
6. इसे कम पॉवर / प्रोसेसर के उपयोग पर काम करना चाहिए.
7. इसमें कॉन्फ्रेंस और मल्टी पीपल्स कॉन्फ्रेंस के दौरान चैट का ऑप्शन होना चाहिए.
8.यह ब्राउज़र और / या ऐप-आधारित इंटरफ़ेस हो सकता है.
9. एन्क्रिप्टेड नेटवर्क संचार की सुविधा होनी चाहिए.
10. एक कॉन्फ्रेंस में शामिल होने के लिए साइन-इन और नॉन-साइन-इन विकल्प होने चाहिए.
11. इसमें यह सुविधा भी होनी चाहिए कि एक ही समय में कई कांफ्रेंस में कई प्रतिभागी एक साथ भाग ले सकें, जैसा कि ज़ूम एप में होता था.
12. चैट (बहुभाषी) के दौरान क्लोज़ कैप्शन की सुविधा होनी चाहिए.
ध्यान रहे कि यह एप ‘मेक इन इंडिया’ स्कीम के तहत सिर्फ किसी स्टार्ट उप कंपनी या टीम द्वारा ही बनाया जाना चाहिए. इसके लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 30 अप्रैल है और 7 मई तक आईडिया प्रस्तुत किया जा सकता है. अंतिम विजेता की घोषणा 29 जुलाई, 2020 को की जाएगी. विजेता टीम को कम से कम चार साल के लिए उत्पाद को चलते रहने में मदद करनी होगी.