Famous Rahim das ke dohe in hindi & Dohe of rahim in hindi ...

 
 

नवाब अब्दुर्रहीम खान खाना मध्यकालीन भारत के कुशल राजनीतिवेत्ता, वीर- बहादुर योद्धा और भारतीय सांस्कृतिक समन्वय का आदर्श प्रस्तुत करने वाले मर्मी कवि माने जाते हैं। उनकी गिनती विगत चार शताब्दियों से ऐतिहासिक पुरुष के अलावा भारत माता के सच्चे सपूत के रुप में किया जाता रहा है।


रहीम का व्यक्तित्व बहुमुखी प्रतिभा-संपन्न था। वे एक ही साथ कुशल सेनापति, प्रशासक, आश्रयदाता, दानवीर, कूटनीतिज्ञ, बहुभाषाविद, कलाप्रेमी, कवि एवं विद्वान थे। रहीम सांप्रदायिक सदभाव तथा सभी संप्रदायों के प्रति समादर भाव के सत्यनिष्ठ साधक थे। वे भारतीय सामासिक संस्कृति के अनन्य आराधक थे। रहीम कलम और तलवार के धनी थे और मानव प्रेम के सूत्रधार थे।
[ads-post] रहीम एक मुसलमान होते हुए भी हिंदू जीवन के अंतर्मन में बैठकर जो मार्मिक तथ्य अंकित किये थे, उनकी विशाल हृदयता का परिचय देती हैं। हिंदू देवी- देवताओं, धार्मिक मान्यताओं और परंपराओं का जहाँ भी रहीम द्वारा उल्लेख किया गया है, पूरी जानकारी एवं ईमानदारी के साथ किया गया है। रहीम ने अपने काव्य में रामायण, महाभारत, पुराण तथा गीता जैसे ग्रंथों के कथानकों को उदाहरण के लिए चुना है और लौकिक जीवन व्यवहार पक्ष को उसके द्वारा समझाने का प्रयत्न किया है, जो सामाजिक सौहार्द एवं भारतीय सांस्कृति की झलक को पेश करता है, जिसमें विभिन्नता में भी एकता की बात की गई है।

रहीम ने अवधी और ब्रजभाषा दोनों में ही कविता की है जो सरल, स्वाभाविक और प्रवाहपूर्ण है। उनके काव्य में श्रृंगार, शांत तथा हास्य रस मिलते हैं तथा दोहा, सोरठा, बरवै, कवित्त और सवैया उनके प्रिय छंद हैं।

रहीम के दोहो की श्रंखला हिंदी साहित्य मार्गदर्शन पर पहले भी प्रकाशित की गयी थी और आगे भी की जाएगी। इसी श्रंखला की कुछ कड़ियाँ आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं :
 
 
 
 
खैर खून खाँसी खुसी, बैर प्रीति मद पान।
रहिमन दाबे ना दबै, जानत सकल जहान॥
 
 
जाल परे जल जात बहि, तजि मीनन को मोह।
रहिमन मछरी नीर को, तऊ न छाँडत छोह॥
 
 
धनि रहीम जल पंक को, लघु जिय पियत अघाई।
उदधि बडाई कौन है, जगत पियासो जाइ॥
 
 
छिमा बडन को चाहिए, छोटन को उतपात।
का रहीम हरि को घटयो, जो भृगु मारी लात॥
 
 
मान सहित विष खाय कै, सम्भु भये जगदीस।
बिना मान अमृत पिये, राहु कटायो सीस॥
 
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रहिमन धागा प्रेम का, मत तोडो चटकाय।
टूटे से फिर ना जुरै, जुरे गाँठ परि जाय।
 
रहिमन वे नर मरि चुके, जे कहुँ माँगन जाहिं।
उनते पहलेवे मुये, जिन मुख निकसत नाहिं॥
 
 
वे रहीम नर धन्य हैं, पर उपकारी अंग।
बाँटनवारे के लगे, ज्यों मेहंदी को रंग॥
 
 
धूर धरत नित शीश पर, कहु रहीम किहिं काज।
जिहि रज मुनि पतनी तरी, सो ढूँढत गजराज॥
 
 
कमला थिर न रहीम कहि, यह जानत सब कोय।
पुरुष पुरातन की बधू, क्यों न चंचला होय॥
 
 
तरुवर फल नहिं खात हैं, सरवर पियहिं न पान।
कहि रहीम पर काज हित, सम्पति सुचहिं सुजान॥
 
 
रहिमन पानी राखिये, बिन पानी सब सून।
पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥
 
 
जो रहिम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसंग।
चंदन विष व्यापत नहीं, लपटे रहत भुजंग॥
 
 
टूटे सुजन मनाइए, जो टूटैं सौ बार।
रहिमन फिरि-फिरि पोहिए, टूटे मुक्ताहार॥
 
 
रहिमन प्रीति सराहिये, मिले होत रंग दून।
ज्यों हरदी जरदी तजै, तजै सफेदी चून॥
 
 
नैन सलोने अधर मधु, कहि रहीम घटि कौन।
मीठो भावै लोन पर, अरु मीठे पर लौन॥
 
 
दीबो चहै करतार जिन्हैं सुख, सो तौ 'रहीम टरै नहिं टारे।
उद्यम कोऊ करौ न करौ, धन आवत आपहिं हाथ पसारे॥
 
 
देव हँसैं सब आपसु में, बिधि के परपंच न जाहिं निहारे।
बेटा भयो बसुदेव के धाम, औ दुंदुभी बाजत नंद के द्वारे॥
 
  -रहीम
 
 

जेहि रहीम मन आपनो कीन्हो चारू चकोर |
नीसी-बसर लाग्यो रहे, कृष्णचंद्रा की ओर ||

 
The chakor bird always takes delight in looking at the moon, disregarding everything else. We should make our mind a chakor bird and should see the divine pervading through the whole world.
रहिमन कौ का करै, ज्वारी चोर लबार |
जो पट रखन हर है, माखन चंखन हर ||
Those who have taken shelter at the all pervading consciousness need not worry about petty thieves and deceitful people.
रहिमन गली है सकरी, दूजो नहीं ठहराही |
आपु अहै, तो हरि नहीं, हरि तो आपुन नहीं ||
The lane is very narrow. There is space for only one. Either ego or God will be accommodated.
अमरबेली बिनु मूल की, प्रतिपलट है ताहि |
रहिमन ऐसे प्रभुहि ताजी, खोजत फिरिए कही ||
The creeper of amarbeli doesn't have any root, it is nourished by God. Why you are searching your roots when God is there to take care.

जाल परे जल जात बही, तजि मीनन को मोह |
रहिमन मछरी नीर को तौ  ना चडती च्चोह ||
A fish is caught in a net and taken away from water. Water lets the fish go. Look at the love that the fish has for water, the fish prefers death to separation.

धनी रहीम गति मीन की, जल बिच्छुरत जिय जाय |
जियत कंज तजि अनत बसी, कहा भौर को भय ||
What a great attachment the fish has to water. If water is not there the fish dies. And look at the bee it flies away from the flower while alive.
प्रीतम च्छबी नैनन बसी, पर-च्छबी कहा समाय |
भरी सराय रहींम लखि, पथिक आप फिर जाय ||
When true love fills the eyes, there is no scope there for anything else. Everything else backtracks as there is no scope for any accommodation.
रहिमन पैदा प्रेम को, निपट सिलसिली गैल  |
बीलछत  पाव पिपीलिको, लोग लड़ावत बैल ||
The path of love is very slippery. Even an ant slips walking path of love and people think that they will travel the path of love by riding a bullock. The path of love can be treaded by those who make their mind understand very subtle things. If one uses gross means for attainig love, one is bound to fail.
रहिमन धागा प्रेम का, मत तोडो चटकाय |
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ पड़ जाये ||
Please don’t break the string of love by applying jerks. If it breaks it can’t be tied, if tied there will be a knot.

रहिमन प्रीति सराहिये, मिले होत रंग दून  |
ज्यों जर्दी हरदी तजै, तजै सफेदी चून  ||
Rahim appreciates that love where lovers lose their identities and create a new identity. If turmeric and lime are mixed both lose their colors and a new color is produced.