निर्जला एकादशी पर श्रीकाशी विश्‍वनाथ मंदिर भी बंद होने के कारण भक्‍तों को जलाभिषेक नहीं करने दिया। मंदिर प्रशासन की ओर से ही विधि विधान से अनुष्‍ठान किया गया।

 

चंदौली में निर्जला एकादशी पर श्रद्धालुओं ने गंगा नदी में लगाई डुबकी

निर्जला एकादशी के अवसर पर मंगलवार को  पश्चिम वाहिनी मां जान्हवी औधेरेश्वर बाबा कीनाराम व महार्षि बाल्मीकि के पावन तट गंगा घाट पर  आस्थावानों की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाते हुए परिवार के सुख समृद्धि की कामना की।

अनुष्‍ठान के बाद मान्यता के अनुसार दान-पुण्य भी किया। जनपद के पश्चिम वाहिनी बलुआ घाट पर सैकड़ों श्रद्धालुओं ने अल सुबह पहुंचकर स्नान किया और पूजा- पाठ करने के बाद भिक्षुओं व पुरोहितों को दान-पुण्य कर यश के भागी बने।

निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है

ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष एकादशी को मनाए जाने वाले व्रत निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी भी कहा जाता है। इसे वर्ष भर की एकादशी में सबसे उत्तम फल देने वाला व्रत माना जाता है। इस बार निर्जला एकादशी दो जून यानी आज है। जैसा की नाम से ही पता चलता है कि इसमें जल का विशेष महत्व होता है।

कोरोना संक्रमण के इस दौर में जहां चिकित्सक अत्यधिक ठंडी चीजों के खाने पीने से परहेज की सलाह दे रहे हैं ऐसे में फ्रीज की जगह सुराही या घड़े का पानी ही स्वास्थ्यवर्धक होगा। इस तरह इस बार निर्जला एकादशी के दिन सुराही या घड़ा दान कर स्वास्थ्य के साथ पुण्य कमाने का भी मौका है।