नई दिल्ली: हिन्दु कैलेण्डर में हर ११वीं तिथि को एकादशी उपवास किया जाता है. एक माह में दो एकादशी व्रत होते हैं जिसमे से एक शुक्ल पक्ष के समय और दूसरा कृष्ण पक्ष के समय होता है. भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए उनके भक्त एकादशी व्रत रखते हैं.

एकादशी उपवास तीन दिनों तक चलता है. यह सुनिश्चित करने के लिए कि अगले दिन पेट में भोजन का कोई अवशेष न रहे श्रद्धालु उपवास के एक दिन पहले केवल दोपहर में भोजन करते हैं. एकादशी के दिन श्रद्धालु कठोर उपवास रखते हैं और अगले दिन सूर्योदय के बाद ही उपवास समाप्त करते हैं. एकादशी उपवास के समय सभी तरह के अन्न का भोजन करना वर्जित होता है.

 

श्रद्धालु अपनी मनोशक्ति और शरीर की सामर्थ के अनुसार पानी के बिना, केवल पानी के साथ, केवल फलों के साथ अथवा एक समय सात्विक भोजन के साथ उपवास को करते हैं. उपवास के समय किस तरह का भोजन खाना है यह निर्णय उपवास शुरू करने से पहले लिया जाता है.

निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi vrat 2020) पूजा और व्रत विधि

इस दिन सुबह स्नान आदि करके भगवान विष्णु की मूर्ति को जल और गंगाजल से स्नान करवाएं. उन्हें व्रत अर्पित करें और रोली चंदन का टिका करें और पुष्प अर्पित करें, बाद में नारियल भी अर्पित करें. मिठाई और फल के साथ तुलसी का पत्ता रखकर भगवान विष्णु को भोग लगाएं और घी का दीपक जलाए. इस दिन भगवान विष्णु के विधि विधान से पूजा करें और भगवान का ध्यान करते हुए ऊँ नमों भगवतो वासुदेवाय् नम: मंत्र का जाप करें. इस दिन कुछ लोग दान भी करते हैं.

इस दिन भक्ति भाव से भगवान का भजन करना और कथा सुननी चाहिए. इस दिन व्रती जल से भरे कलश को सफेद कपड़े से ढक कर रख दे और उस पर चीन तथा दक्षिणा रखकर ब्राह्मण को दें और गरीबों को भी दान करें, तभी निर्जला एकादशी व्रत का विधान पूरा होता है.

निर्जला एकादशी (Nirjala Ekadashi vrat 2020 Importance) महत्व

इस व्रत की मान्यता है कि निर्जला एकादशी का व्रत जो भी रखता है उसे 24 एकादशी के व्रतों के बराबर पुण्य मिलता है. इस व्रत को पूर्ण करने भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं और उनकी कृपा प्राप्त होती है. जीवन में चल रही बाधाओं से मुक्ति मिलती. रोग दूर होते हैं. घर में सुख समृद्धि बनी रहती है. लक्ष्मी का वास होता है.