pakistani hindu refugee in delhi  ani twiter pic

कोरोना की मार भारत में रह रहे हिन्दू शरणार्थियों पर भी बुरी तरीके से पड़ी है और वे सरकार से मदद की उम्मीद कर रहे हैं। कोरोना लॉकडाउन के चलते दिल्ली से सिग्नेचर ब्रिज के नीचे रह रहे पाकिस्तानी शरणार्थियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा रहा है। समाचर एजेंसी एएनआई के साथ बातचीत में पाक हिन्दू शरणार्थी बादल राम ने कहा, “हम अपने घरों को नहीं छोड़ सकते हैं इसलिए हम बेरोजगार हैं। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वे मदद करें क्योंकि हमारे पास पर्याप्त पैसे नहीं हैं।”

 

पाकिस्तानियों की राय, कोरोना के खतरे को बढ़ा चढ़ाकर बताया जा रहा है

पूरी दुनिया में दो लाख से अधिक लोगों को देखते ही देखते मौत की नींद सुला देने वाली बीमारी कोविड-19 को अधिकांश पाकिस्तानी बहुत बड़ा खतरा नहीं मानते। एक सवेर्क्षण में खुलासा हुआ है कि हर पांच में से तीन पाकिस्तानी का यह मानना है कि कोरोना वायरस जितना बड़ा खतरा है, उससे कहीं अधिक बढ़ा चढ़ाकर इसे पेश किया जा रहा है।

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पाकिस्तान में कोरोना का प्रकोप तेजी से फैल रहा है। मंगलवार शाम तक देश में कोरोना के 145०4 पुष्ट मामले सामने आ चुके हैं और 312 लोग इसकी चपेट में आकर अपनी जान गंवा चुके हैं। आशंका जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में यह बीमारी देश में और गंभीर रूप ले सकती है।

इसके बावजूद, गैलप संस्था के एक सर्वे में पता चला कि मार्च के बाद से हर पांच में से तीन पाकिस्तानी को ऐसा लगा है कि कोरोना वायरस के खतरे को काफी बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जा रहा है। सर्वे  में सवाल पूछा गया था, “कृपया बताएं कि आप इस बात से कितने सहमत या असहमत हैं कि कोरोना वायरस के खतरे को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया है।”

जवाब में 60 फीसदी लोगों ने कहा कि वे इससे सहमत हैं कि इस खतरे को बढ़ा चढ़ाकर पेश किया गया है। जबकि, 38 फीसदी लोगों ने कहा कि ऐसा नहीं है, खतरा जितना बड़ा है, उसे इसी तरह से पेश किया गया है। सवेर् में पता चला कि राष्ट्रीय औसत भले 60 फीसदी हो लेकिन बलूचिस्तान प्रांत में तो 89 फीसदी लोगों ने कहा कि कोरोना का खतरा कोई इतना बड़ा नहीं है जितना इसे बताया जा रहा है।