पूर्ण चंद्र ग्रहण- ये तब होता है, जब चांद पूरी तरह से अम्ब्रा में पहुंच जाता है. ऐसे में पृथ्वी सूरज की किरणों को सीधे तौर पर चांद पर नहीं पड़ने देती. सूरज की रोशनी पृथ्वी से छनकर चांद पर पड़ती है. ये किरणें पृथ्वी के धरातल से टकराकर अलग-अलग रंगों में बंटती हैं, जो नीले रंग की किरणें होती हैं, वो अलग-अलग दिशा में निकल जाती हैं. वहीं लाल रंग की किरणें नीचे की तरफ मुड़ती हैं और चांद पर पड़ती हैं. इससे चांद एकदम गहरा लाल दिखने लगता है. पृथ्वी के वातावरण में जितने ज्यादा डस्ट पार्टिकल या धुआं होगा, चांद उतना गहरा लाल दिखेगा.

पार्शियल- इस कंडिशन में चांद पेनम्ब्रा में होता है, लेकिन उसका हल्का सा हिस्सा अम्ब्रा में एंट्री कर लेता है. ऐसी कंडिशन में पृथ्वी की थोड़ी ही छाया चांद पर पड़ती है.

पेनम्ब्रल- चांद का कोई भी हिस्सा अम्ब्रा में एंटर नहीं करता है. पृथ्वी की मुख्य छाया के बाहर ही होता है. ऐसे में पृथ्वी की छाया सीधे तौर पर चांद पर तो नहीं पड़ती, लेकिन उसकी चमक फीकी ज़रूर पड़ जाती है. चांद मटमैला दिखने लगता है.

अभी वाला चंद्र ग्रहण कौन-सा है?

पेनम्ब्रल है. यानी लाल नहीं दिखेगा, बल्कि फीका और मटमैला दिखेगा. BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, विज्ञान प्रसार के वरिष्ठ वैज्ञानिक टी.वी. वेंकटेश्वरन ने बताया कि ग्रहण का असर बहुत ज्यादा नहीं दिखेगा. चांद के केवल 58 फीसद हिस्से पर इसका असर होगा.

इसे स्ट्रॉबेरी क्यों कह रहे हैं?

क्योंकि जून के महीने के आस-पास स्ट्राबेरी की अच्छी-खासी खेती होती है, तो ये इस महीने में पड़ने वाले ग्रहण को स्ट्रॉबेरी निकनेम के तौर पर दिया गया है.

कब और कहां दिखेगा?

5 जून की रात 11 बजकर 15 मिनट से ग्रहण शुरू होगा. हाई लेवल पर 12 बजकर 54 मिनट पर पहुंचेगा. 6 जून की सुबह 2 बजकर 34 मिनट पर खत्म होगा. यानी कुल तीन घंटे का ग्रहण होगा. इस दौरान एशिया, ऑस्ट्रेलिया, यूरोप और अफ्रीका से ये ग्रहण देखा जा सकेगा.

स्ट्रॉबेरी चंद्र ग्रहण साल 2020 का दूसरा चंद्र ग्रहण है. पहला जनवरी में हुआ था. और तीसरा जुलाई और चौथा नवंबर में होगा.