कम तापमान से होने वाली क्षति जैसे; द्रुतशीतन (Chilling) और जमाव (Freezing) ये सभी पौधों में हो सकती है, लेकिन विभिन्न पौधों पर क्षति के प्रकार भी भिन्न होते है। पौधों मे 0 डिग्री सेल्सियस से ऊपर के तापक्रम से होने वाली क्षति फ्रीजिंग के बजाय द्रुतशीतन (चिलिंग) वाली क्षति कहलाती है। जबकि तापमान का वह स्तर जहां पत्तों की कोशिकाओं का पानी जम कर बर्फ बनने लगता है, को फ्रीजिंग (जमाव) क्षति कहा जाता है। पाले से प्रत्यक्ष क्षति तब होती है जब जमाव वाले तापमान के कारण पत्तियों का पानी (जीवद्रव्य) बर्फ के क्रिस्टल के रूप मे कोशिकाओं के अंदर ही जम जाते है, जबकि अप्रत्यक्ष क्षति तब हो सकती है जब ये बर्फ पौधों के अंदर तो बनती है लेकिन कोशिकाओं के बाहर। इस प्रकार इंट्रासेल्युलर बर्फ का निर्माण "जीवद्रव्य की संरचना का यांत्रिक विघटन" कहा जा सकता है जो वास्तव में पौधों को घायल करता है। इस प्रकार होने वाली क्षति का परिमाण मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि तापमान कितनी तेजी से गिरता है और फ्रीजिंग से पहले यह किस स्तर तक सुपरकूल (ठंडा) करता है। पाले के प्रभाव से फसलों को बचाने के लिए निम्न उपाय किये जाने चाहिए; फसलों को स्थाई रूप से पाले से बचाने के लिए खेत की मेड़ों पर वायु अवरोधक पेड़ जैसे शहतूत, शीशम, बबूल, खेजड़ी आदि लगाने से शीतलहर से बचाव हो सके है। पाला पडऩे के संभावित दिनों मे खेतों मे निराई - गुड़ाई या जुताई वाले कार्यों को टालना चाहिए, जिससे मृदा का तापमान कम नही हो पाता। पाले की संभावना वाले दिनों मे 500 ग्राम थोयोयूरिया (Thiourea) का 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करना भी फायदेमंद रहता है। गंधक (सल्फर) गर्म प्रकृति का होने के कारण 24 किग्रा सल्फर पाउडर को प्रति हैक्टेयर के हिसाब से फसलों पर भुरकाव करना चाहिए। या घुलनशील सल्फर 1.5 कि.ग्रा. प्रति हैक्टेयर को 600 लीटर पानी में मिलाकर छिडक़ाव किया जा सकता है। जब तापमान बहुत कम और पाला पड़ने की संभावना अत्यधिक हों तो शाम के समय हल्की सिंचाई करना। यदि आवश्यकता हों तो 0.1 प्रतिशत (1 मि.ली. प्रति लीटर पानी में) व्यावसायिक उपयोग वाले गंधक के तेजाब का छिड़काव करें (अर्थात एक लीटर तेजाब को 1000 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रेयर द्वारा पौधों पर छिड़काव करना)। खेत के आस-पास शाम को या रात के समय हवा आने की दिशा वाली मेड़ों पर कचरा एवं घास फूस को अधजला कर के धुँआ करना। नोट:- सम्भावित पाला पड़ने की अवधि में इन उपायों को दोहराते रहना चाहिए।
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फसल को पाले (Frost) से बचाये
सर्दियों की ऋतु में रात के समय जब न्यूनतम तापमान सामान्य से थोड़ा कम होता है तब प्रायः कोहरा छाये रहना तो एक आम बात है, लेकिन यदि यह तापमान लगभग 4-5 डिग्री सेंटीग्रेड तक या इससे भी नीचे पहुँच जाए तो कोहरे के साथ-साथ पाला (Frost) पड़ने का खतरा बहुत ही अधिक बढ़ जाता है।
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