लेखिका: महादेवी वर्मा
नीलू की कथा उसकी मां की कथा से इस प्रकार जुड़ी है कि एक के बिना दूसरी अपूर्ण रह जाती है. उसकी अल्सेशियन मां उत्तरायण में लूसी के नाम से पुकारी जाती थी. हिरणी के समान वेगवती सांचे में ढली हुई देह, जिसमें व्यर्थ कहने के लिए एक तोला मांस भी नहीं था. ऊपर काला आभास देनेवाले भूरे पीताभ रोम, बुद्धिमानी का पता देनेवाली काली पर छोटी आंखें, सजग खड़े कान और सघन, रोयेंदार तथा पिछले पैरों के टखनों को छूनेवाली लम्बी पूंछ, सब कुछ उसे राजसी विशेषता देता था. थी भी वह सामान्य कुत्तों से भिन्न.