राज्यों के पर्यावरण एवं वन मंत्रियों का दो दिवसीय सम्मेलन 6 अप्रैल, 2015 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में शुरू हुआ था। जिसका समापन 7 अप्रैल 2015 को हुआ। इस दो दिवसीय सम्मेलन में अलग-अलग राज्यों के 30 मंत्रियों ने भाग लिया था, जिसमें विभिन्न मुद्दों जैसे- कचरे से संपदा, कारोबार को आसान बनाना, टीएसआर सुब्रह्मण्यम समिति की सिफारिशों, वन, वन्य जीवन, प्रदूषण से संबंधित मुद्दों, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन की एक विस्तृत श्रृंखला पर चर्चा की गयी।
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Read more: भारत और जलवायु परिवर्तन -पर्यावरण की रक्षा के लिए भारतीय प्रस्ताव
हमारे देश मे कई सरकारी और गैर सरकारी संगठनो ने पर्यावरण संरक्षण के लिए मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति एवं प्राकृतिक संसाधनो के रख रखाव मे बढ़ती रुचि के लिए नेतृत्व किया है। बॉम्बे प्राकृतिक इतिहास संस्था (BNHS)/ समाज, विज्ञान और पर्यावरण केंद्र, नई दिल्ली, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, भारत के वन्य जीवन संस्थान, देहरादून इत्यादि कुछ प्रमुख संस्थाएं है जो पर्यावरण और वन्य जीवन संरक्षण के क्षेत्र मे तेजी से कार्य कर रहे है।
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Read more: भारत और जलवायु परिवर्तन-पर्यावरण के क्षेत्र मे गैर सरकारी संगठन और वकालत संस्थान
प्रदूषण की प्रकृति और सघनता मानव स्वास्थ्य पर इसके हानिकारक प्रभाव की गंभीरता को निर्धारित करता है | वे अशुद्धियाँ जिनकी उत्पत्ति सीधे स्त्रोतों से होती है, उन्हे प्राथमिक प्रदूषण कहा जाता है , उदाहरण के लिए CO 2, SO 2, NO | जब कोई संदूषित पदार्थ जैसे HC, NO, O 2वातावरण(नमी, धूप)के साथ मिल कर नया उत्पाद बनाता है जैसे PAN( पेरोक्सीसाइटल नाइट्रेट ), पेट्रोकेमिकल धुंध, फॉर्मल डिहाइड उन्हें माध्यमिक प्रदूषण कहते हैं
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Read more: पर्यावरणीय मुद्दे और सम्मेलन -प्रदूषण का वर्गीकरण