Krishi Gyaan

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इस वास्तविकता से इनकार नहीं किया जा सकता है कि आज भी हमारे देश में बहुसंख्यक किसान सीमान्त या लघु कृषकों की श्रेणी में आते हैं। मोटे तौर पर ऐसे कृषकों से आशय है एक हेक्टेयर से कम भूमि जोत वाले कृषक। इनमें से अधिकांश किसानों की पैदावार अपने परिवार के लिये गुजर-बसर करने लायक खाद्यान्न के उत्पादन तक ही सिमटी हुई है। सरप्लस उपज तो बहुत दूर की बात है- बाढ़, सूखा या अन्य विपदाओं के कारण किसानों के लिये कभी-कभी तो खेती की लागत भी निकालनी मुश्किल पड़ जाती है। अच्छी उपज मिल भी जाये तो उचित मूल्य मिलना मुश्किल होता है।
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भारत एक कृषि प्रधान देश है. कृषि भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. भारत में कृषि सिंधु घाटी सभ्यता के दौर से की जाती रही है. 1960 के बाद देश में कृषि के क्षेत्र में हरित क्रांति के साथ नया दौर आया. आइए जानते हैं भारत की खेती से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्य.

aajtak.in [Edited by: नेहा खत्री]
नई दिल्ली, 26 अगस्त 2014, अपडेटेड
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पारिस्थितिक तंत्र ऊर्जा चक्र और बाहरी स्रोतों से प्राप्त पोषक तत्वों द्वारा खुद को बनाए रखता है । पहले पौष्टिकता स्तर पर, प्राथमिक उत्पादक(पौधों, शैवाल, और कुछ बैक्टीरिया) संश्लेषण के माध्यम से जैविक संयंत्र सामग्री के उत्पादन के लिए सौर ऊर्जा का उपयोग करते हैं । शाकाहारी जानवर जो सिर्फ पौधे खाते हैं, द्वितीय पौष्टिक स्तर को बनाते हैं । शिकारी जानवर जो शाकाहारी जानवरों को खाते हैं तीसरा पौष्टिकता स्तर बनाते हैं ।
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