Krishi Gyaan
जल प्रदूषण जल निकायों के प्रदूषित (जैसे झीलों, नदियों, समुद्रों, जलवाही स्तर और भूजल) हो जाने को कहते हैं | पर्यावरण की दुर्दशा का ये रूप तब होता है जब प्रदूषकों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से हानिकारक यौगिकों का शोधन किए बिना जल निकायों में छोड़ दिया जाता है |
- Details
- Parent Category: Magazine
- Category: Krishi Gyaan
- Hits: 1
अधिकत्तर नवीकरणीय संसाधन जैविक प्रकार के होते है । नवीकरणीय संसाधनों की बृद्धि और पुरुत्थान क्षमता को आसानी से नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे इन संसाधनों को लगातार जीवित रखा जा सके । यदि इन संसाधनों का उपभोग पुनरुत्थान की दर से लगातार बढ़ता रहता है तो इनकी गुणवत्ता पर विपरीत असर पड़ता है परन्तु ये कभी भी विलुप्त नहीं होते हैं। उदाहरण: जंगल संसाधन, जल संसाधन, खनिज संसाधन, वायु संसाधन आदि । उदाहरण: जंगल संसाधन, जल संसाधन, खनिज संसाधन, वायु संसाधन आदि ।
- Details
- Parent Category: Magazine
- Category: Krishi Gyaan
- Hits: 1
ऊर्जा प्रकृति में स्वतंत्र रूप से मौजूद है लेकिन उसमे से कुछ असीमित मात्रा में मौजूद है जो कभी समाप्त नहीं होती, उसे नवीकरणीय ऊर्जा कहा जाता है जबकि बाकी ऊर्जा सीमित मात्रा में उपलब्ध है,जिसे बनने में तो करोड़ों साल लग जाते हैं लेकिन समाप्त एक दिन में हो जाती है,इन्हें गैर- नवीकरणीय/अनवीकरणीय ऊर्जा संसाधन कहा जाता है। गैर- नवीकरणीय ऊर्जा जीवाश्म ईंधनों (कोयला, कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस) और यूरेनियम से प्राप्त होने वाली ऊर्जा है। जीवाश्म ईंधन मुख्य रूप से कार्बन से बनता है।
- Details
- Parent Category: Magazine
- Category: Krishi Gyaan
- Hits: 1
नवीकरणीय वह ऊर्जा है जो नवीकरणीय (अर्थात स्वाभाविक रूप से पूनःपूर्ति में सक्षम) प्राकृतिक संसाधनों, जैसे-सूर्य ताप , वायु , वर्षा , ज्वार और भूतापीय गर्मी से उत्पन्न होती है । नवीकरणीय ऊर्जा प्रौद्योगिकियों को सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, पनबिजली / लघु पनबिजली, बायोमास और जैव ईंधन के रूप में परिभाषित किया जाता है। नवीकरणीय ऊर्जा संसाधन हमेशा उपयोग किये जा सकने के लिए उपलब्ध हैं, और कभी खत्म नहीं होंगे | यही कारण है कुछ लोग इसे हरित ऊर्जा कहते हैं।
- Details
- Parent Category: Magazine
- Category: Krishi Gyaan
- Hits: 1
जल चक्र, पृथ्वी के ऊपर जल के अस्तित्व और गति के बारे में वर्णन करता है | पृथ्वी का पानी हमेशा गतिमान रहता है और सदैव अपनी अवस्थाएँ बदलता रहता है अर्थात तरल से वाष्प रूप में व वाष्प से बर्फ में और फिर वापस तरल अवस्था में | जल चक्र अरबों वर्षों से काम कर रहा है और पृथ्वी पर सभी जीव कार्य करने के लिए इस पर निर्भर हैं; इसके बिना पृथ्वी बिलकुल नीरस हो जाएगी |
- Details
- Parent Category: Magazine
- Category: Krishi Gyaan
- Hits: 1