Krishi Gyaan
29 अप्रैल 2015 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद में प्रतिपूरक वनीकरण कोष (सीएएफ) विधेयक, 2015 को प्रस्तुत कर अपनी मंजूरी दे दी है। कानून का उद्देश्य गैर वन प्रयोजन के लिए आवंटित वन भूमि के एवज में जारी की गयी राशि का शीघ्र उपयोग सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और राज्य दोनों तथा प्रत्येक केंद्र शासित प्रदेशों को संस्थागत व्यवस्था प्रदान करना है। सीएएफ विधेयक, 2015, वनों के लिए सुरक्षा, जागरूकता और पारदर्शिता प्रदान करने के लिए संस्थागत व्यवस्था प्रदान करता है।
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Read more: भारत और जलवायु परिवर्तन -प्रतिपूरक वनीकरण कोष विधेयक, 2015
5 जून 2015 को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग एवं जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने मुंबई पोर्ट ट्रस्ट (एमबीटी), जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (जेएनपीटी) और न्हावा तथा उरण में ओएनजीसी की सुविधा के लिए भारत में अपने तरह के पहले टीयर-I ऑयल रिस्पांस सेंटर (ओएसआरसी) का उद्धाटन किया। इस केंद्र की स्थापना के पीछे का उद्देश्य समुद्री पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए पर्याप्त सुरक्षा सुनिश्चित करने के क्रम में तेल बहाव का पता लगाना और रिपोर्टिंग के लिए उपयुक्त और प्रभावी प्रणाली विकसित करना है ।
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Read more: भारत और जलवायु परिवर्तन -टीयर-I ऑयल रिस्पांस सेंटर (मुंबई और जेएनपीटी हार्बर)
अप्रैल 1975 में ओडिशा राज्य सरकार द्वारा कनिका राज के पूर्व-जमींदारी जंगलों को भितरकनिका वन्यजीव अभयारण्य के रूप में घोषित किया गया था। भितरकनिका वन्यजीव अभयारण्य भारत के सबसे बड़े मगरमच्छ आवासों में से एक है और एक प्रमुख तटीय पारिस्थितिकी तंत्र है। सन 1998 में इसे अपनी पारिस्थितिकी, जीव, पुष्प, भू रूपात्मक और प्राणि एसोसिएशन तथा महत्व एवं सुरक्षा के उद्देश्य के कारण एक राष्ट्रीय उद्यान घोषित किया गया। अगस्त 2002 में इसे दूसरे रामसर साइट (अंतरराष्ट्रीय महत्व की आद्रभूमि) के रूप में नामित किया गया था।
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Read more: भारत और जलवायु परिवर्तन -भितरकनिका वन्यजीव अभयारण्य (ओडिशा)
अर्द्ध शुष्क उष्णकटिबंधीय अंतर्राष्ट्रीय फसल अनुसंधान संस्थान (ICRISAT) ने 29 दिसंबर 2014 को ग्रीन फैबलेट (छोटे किसानों के लिए) की शुरूआत की थी। ग्रीन फैबलेट विशेष रूप से निर्मित फोन और टैबलेट कंप्यूटर की एक कम लागत वाला संयोजन है। यह डिवाइस ग्रीन सिम द्वारा संचालित की जाती है, जिसका परिचालन -20 डिग्री सेल्सियस से 60 डिग्री सेल्सियस में होता है। डिवाइस को कृषि हेतु एनयूएनसी प्रणाली के सहयोग से आईसीटी नवाचार में उत्कृष्ट आईसीआरआईएसएटी केन्द्र द्वारा विकसित किया गया है।
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राज्यों के पर्यावरण एवं वन मंत्रियों का दो दिवसीय सम्मेलन 6 अप्रैल, 2015 को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में शुरू हुआ था। जिसका समापन 7 अप्रैल 2015 को हुआ। इस दो दिवसीय सम्मेलन में अलग-अलग राज्यों के 30 मंत्रियों ने भाग लिया था, जिसमें विभिन्न मुद्दों जैसे- कचरे से संपदा, कारोबार को आसान बनाना, टीएसआर सुब्रह्मण्यम समिति की सिफारिशों, वन, वन्य जीवन, प्रदूषण से संबंधित मुद्दों, जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन की एक विस्तृत श्रृंखला पर चर्चा की गयी।
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