Krishi Gyaan
हमारे देश मे कई सरकारी और गैर सरकारी संगठनो ने पर्यावरण संरक्षण के लिए मार्ग प्रशस्त किया है। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, प्रकृति एवं प्राकृतिक संसाधनो के रख रखाव मे बढ़ती रुचि के लिए नेतृत्व किया है। बॉम्बे प्राकृतिक इतिहास संस्था (BNHS)/ समाज, विज्ञान और पर्यावरण केंद्र, नई दिल्ली, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, भारत के वन्य जीवन संस्थान, देहरादून इत्यादि कुछ प्रमुख संस्थाएं है जो पर्यावरण और वन्य जीवन संरक्षण के क्षेत्र मे तेजी से कार्य कर रहे है।
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Read more: भारत और जलवायु परिवर्तन-पर्यावरण के क्षेत्र मे गैर सरकारी संगठन और वकालत संस्थान
प्रदूषण की प्रकृति और सघनता मानव स्वास्थ्य पर इसके हानिकारक प्रभाव की गंभीरता को निर्धारित करता है | वे अशुद्धियाँ जिनकी उत्पत्ति सीधे स्त्रोतों से होती है, उन्हे प्राथमिक प्रदूषण कहा जाता है , उदाहरण के लिए CO 2, SO 2, NO | जब कोई संदूषित पदार्थ जैसे HC, NO, O 2वातावरण(नमी, धूप)के साथ मिल कर नया उत्पाद बनाता है जैसे PAN( पेरोक्सीसाइटल नाइट्रेट ), पेट्रोकेमिकल धुंध, फॉर्मल डिहाइड उन्हें माध्यमिक प्रदूषण कहते हैं
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Read more: पर्यावरणीय मुद्दे और सम्मेलन -प्रदूषण का वर्गीकरण
जलवायु परिवर्तन हजारों लाखों सालों से मौसम के स्वरूप के सांख्यिकीय वितरण में एक महत्वपूर्ण और स्थायी परिवर्तन है | यह औसत मौसम की स्थिति में एक बदलाव हो सकता है, या औसत स्थिति (यानी, अधिक या कम चरम मौसम की घटनाओं) में आसपास के मौसम के वितरण के बारे बताता है।
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जंगली जानवरों की प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर आधारित सम्मेलन (यह सीएमएस या बॉन सम्मेलन के रूप में भी जाना जाता है, बॉन समझौते के साथ भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है) का लक्ष्य स्थलीय, समुद्री और एवियन (उड़ने वाली) प्रजातियों का संरक्षण करना है। सीआईटीईएस (वन्य जीव और वनस्पति की लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर आधारित सम्मेलन) को वाशिंगटन सम्मेलन के रूप में भी जाना जाता है जिसकी शुरूआत 1963 में की गयी थी। रामसर सम्मेलन अंतर्राष्ट्रीय महत्व की झीलों पर आधारित सम्मेलन है।
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Read more: पर्यावरणीय मुद्दे और सम्मेलन -बॉन सम्मेलन, वाशिंगटन और रामसर सम्मेलन
ई-अपशिष्ट एक सामान्य शब्द के रूप में प्रयोग किया जाता है जो विद्युत् चालित घटकों से युक्त सभी प्रकार के कचरे से जुडा होता है। संक्षिप्त रूप में ई-अपशिष्ट या अपशिष्ट इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण (WEEE) वह शब्द है जिसका प्रयोग पुराने, खत्म हो चुके या बिजली को उपयोग कर रहे उपयोगहीन उपकरणों का वर्णन करने के लिए किया जाता है। इसमें कंप्यूटर, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, फ्रिज आदि शामिल हैं जिसे उनके मूल प्रयोगकर्ताओं द्वारा त्याग दिया जाता है। बहुमूल्य सामग्री के साथ- साथ खतरनाक सामग्री दोनों में ई-अपशिष्ट शामिल है जिसे विशेष निगरानी और पुनर्चक्रण के तरीकों की आवश्यकता होती है।
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Read more: पर्यावरणीय मुद्दे और सम्मेलन -ई-अपशिष्ट (ई-कचरे) के प्रकार