Krishi Gyaan
संयुक्त राष्ट्र संघ के सतत् विकास सम्मेलन को रियो, 2012 के नाम से भी जाना जाता है। रियो+20 (पुर्तगाली उच्चारण या पृथ्वी सम्मेलन 2012) विश्व समुदाय के पर्यावरण तथा आर्थक उद्देश्यों संबंधित सतत् विकास पर तीसरा सम्मेलन ब्राजील के रियो डि जेनेरियो शहर में 13 से 22 जून, 2012 को सम्पन्न हुआ। रियो+20, पिछले 20 वर्षों में 1992 के पृथ्वी सम्मेलन के बाद हुई प्रगति को याद करने का सम्मेलन था जो 20 वर्ष बाद उसी शहर में हुआ।
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Read more: पर्यावरणीय मुद्दे और सम्मेलन -सतत विकास पर संयुक्त राष्ट्र संघ का सम्मेलन
व्हेलिंग नियमन के अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (आईसीआरडब्ल्यू) पर 2 दिसंबर 1946 को वॉशिंगटन डीसी में हस्ताक्षर किए गए थे। सम्मेलन का उद्देश्य नियमों की स्थापना करने के लिए आईडब्ल्यूसी की क्षमता को स्थापित करना था। जैसे- सम्मेलन के लक्ष्यों और उद्देश्यों को पूरा करने और व्हेल संसाधनों के अधिकतम उपयोग प्रदान करने के लिए संरक्षण प्रदान करता है।
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Read more: पर्यावरणीय मुद्दे और सम्मेलन -व्हेलिंग नियमन के लिए अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन
मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल एक अंतरराष्ट्रीय संधि है जिसे ओजोन क्षरण को रोकने KE LIYE बनाया गया है/ इस प्रोटोकॉल के माध्यम से उन पदार्थों के उत्पादन को कम करना है जो कि ओजोन परत के क्षरण के लिए जिम्मेदार है। इस संधि पर 16 सितंबर, 1987 को हस्ताक्षर किए गये थे और यह 1 जनवरी, 1989 से यह प्रभावी हो गयी, जिसकी पहली बैठक मई 1989 में हेलसिंकी में हुयी थी। तब से अभी तक इसमें सात संशोधन 1990 (लंदन), 1991 (नैरोबी), 1992 (कोपेनहेगन), 1993 (बैंकाक), 1995 (वियना), 1997 (मॉन्ट्रियल), और 1999 (बीजिंग) हो चुके हैं।
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Read more: पर्यावरणीय मुद्दे और सम्मेलन -मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल और वियना सम्मेलन (वियना संधि)
वैश्विक मद्धिम को पृथ्वी की सतह तक पहुंचने वाले सौर विकिरण की मात्रा में कमी के रूप में परिभाषित किया जाता है। जीवाश्म ईंधन के उप-उत्पाद छोटे कण या प्रदूषक हैं जो सौर ऊर्जा को अवशोषित करते हैं और अंतरिक्ष में सूर्य की रोशनी को वापस दर्शाते हैं। इस तथ्य या घटना को पहली बार 1950 में मान्यता दी गयी थी। वैज्ञानिकों का मानना है कि 1950 के बाद पृथ्वी तक पहुंचने वाली सूर्य की ऊर्जा में अंटार्कटिका में 9%, संयुक्त राज्य अमेरिका में 10%, यूरोप के कुछ हिस्सों में 16% और रूस में 30% से की कमी आयी है।
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जब तापमान, प्रकाश, या पोषक जैसी स्थिति में प्रवालों पर परिवर्तित होने का दवाब पड़ता है तो वे अपने ऊतकों में रहने वाले सहजीवी शैवालों को त्याग देते हैं जिसके कारण वे पूरी तरह विरंजित (पूरी तरह सफेद) हो जाते हैं। प्रवाल विरंजल का कारण गर्म पानी या गर्म तापमान हो सकता है। जब पानी अत्यधिक गर्म होता है तो प्रवाल अपने ऊतकों में रहने वाले सूक्ष्म शैवाल (zooxanthellae) को त्याग देते हैं जिस कारण प्रवाल पूरी तरह से विरंजित (पूरी तरह सफेद) हो जाते हैं। प्रवाल, विरंजन के दौरान भी जीवित रह सकते हैं लेकिन वे अत्यधिक दवाब औऱ मृत्यु के साये में रहते है।
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Read more: पर्यावरणीय मुद्दे और सम्मेलन -=प्रवाल विरंजन (श्वेत पड़ना)