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Biography (hindi)

कपिल देव जीवनी - Biography of Kapil Dev in Hindi Jivani

क्रिकेट के इतिहास में महान आलराउंडर के रूप में कपिल देव का नाम जाना जाता है । उन्होंने भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान बन कर टीम को अनेक बार विजय दिलाई । 1983 में वर्ल्ड कप जीतकर उनके नेतृत्व में टीम ने इतिहास रच डाला । उसके तीन वर्ष बाद उनकी कप्तानी में इग्लैड में भारत ने सीरीज जीती । वह कुशल मीडियम पेस गेंदबाज, मध्यम क्रम के तेज हिट करने वाले बल्लेबाज, कुशल फील्डर तथा श्रेष्ठ कप्तान रहे । उन्हें हम आलराउंडर क्रिकेटर कह सकते हैं । कपिल देव का पूरा नाम कपिल देव रामलाल निखंज है । वह दाहिने हाथ के बल्लेबाज व दाहिने हाथ के तेज मध्यम गति के गेंदबाज रहे ।

        कपिल देव एकमात्र भारतीय क्रिकेटर हैं जिन्हें तीन राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हो चुके हैं । 1979-80 में उन्हें ‘अर्जुन पुरस्कार’ दिया गया । उन्हें ‘पद्मश्री’ पुरस्कार से तथा 1991 में ‘पद्मभूषण’ से सम्मानित किया गया । 70 के दशक में अन्तिम वर्षों तक भारतीय टीम में कोई अच्छा ‘ओपनिंग बॉलर’ नहीं था । तब कपिल का क्रिकेट में आगमन हुआ । वह दाहिने हाथ के मध्यम गति के अनूठे खिलाड़ी रहे जो अपने समय के सर्वश्रेष्ठ ‘हिटर’ रहे और वह मानवीय संवेदनाओं से पूर्ण एक श्रेष्ठ बल्लेबाज थे जिन्होंने अभूतपूर्ण सफलता प्राप्त की ।
        
        Kapil Dev कपिल देव ने क्रिकेट में अपना पहला मैच 1975  में हरियाणा की तरफ से खेला था जिसमें उन्होंने पंजाब के खिलाफ खेलते हुए 6 विकेट लिए थे और पंजाब को 63 रन पर सिमटा दिया | इस तरह हरियाणा की जीत हुयी थी | कपिल देव ने इस सीजन में 30 मैच खेलते हुए 121 विकेट लिए थे | 1976–77 सीजन में उन्होंने जम्मू कश्मीर के खिलाफ खेलते हुए 8 विकेट लेकर अपनी टीम को जीत दिलाई थी | इसके बाद उन्होंने अपने फर्स्ट क्लास करियर में कई रिकॉर्ड कायम किये थे इसके बा उन्होंने रणजी में भी कई मैचो में बेहतरीन प्रदर्शन किया था |

        इसके बाद उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखा और 1978 में उन्होंने अपना पहला टेस्ट मैच पाकिस्तान के खिलाफ खेला था | 1978 से लेकर 1994 तक उन्होंने भारतीय टीम को उचाइयो तक पहुचाया और कई रिकॉर्ड भी कायम किये |  कपिल देव ने 131 टेस्ट मैचो में 5248 रन और 434 विकेट लिए थे | अपने टेस्ट करियर में उन्होंने 163 रन की सर्वाधिक पारी खेली थी | इसके अलावा उन्होंने अपने टेस्ट करियर में 8 शतक और 27 अर्द्धशतक बनाये थे |

        कपिल देव विश्व क्रिकेट में सबसे कम समय में 100 विकेट लेने वाले खिलाड़ी बने थे और सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी थे | कपिल देव ने भारतीय क्रिकेट को नई दिशा प्रदान की और स्वयं भी प्रशंसा और प्रसिद्धि पाई । 1983 में कपिल देव के नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट टीम ने विश्व कप जीता । यह उनकी अभूतपूर्व उपलब्धियाँ हैं ।

        बल्लेबाज के रूप में उन्होंने क्रिकेट की महान ऊंचाइयों को छू लिया । ‘टनब्रिजवेल्स, इंग्लैंड में जिंबाब्वे के विरुद्ध 175 अविजित रन बना कर उन्होंने भरपूर प्रशंसा बटोरी । 1983 के विश्व कप में कपिल देव ने 17 रन पर 5 विकेट के स्कोर पर खेलना आरम्भ किया और 60 ओवर में 266 रन पर टीम को पहुंचा दिया । उन्होंने अविजित 175 रन बना डाले ।

        1990 में इंग्लैंड के विरुद्ध टैस्ट खेलते हुए फालोआन बचाने के लिए एडी हेमिंग्ज की गेंद पर उन्होंने 4 बार 6 छक्के लगाकर सबको चौंका दिया । उनका 434 विकेट लेने का रिकार्ड है । कपिल ऐसे क्रिकेटर हैं जिन्होंने 5248 रन के साथ ही टैस्ट मैचों में 400 विकेट लिए हैं । किसी भारतीय द्वारा सबसे ज्यादा टैस्ट मैच खेलने का रिकार्ड भी कपिल देव के ही नाम है । उन्हें पिछले दिनों भारतीय क्रिकेट टीम का कोच भी बनाया गया था |

        वर्ग 2002 में विज्डन (लंदन) द्वारा कपिल देव को ‘इंडियन प्लेयर ऑफ द सेंचुरी’ चुना गया । 35 सदस्यों की निर्णायक टीम ने सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर को पीछे छोड़कर कपिल देव को चुना । उनका कहना था कि कपिल एक ऐसा खिलाड़ी था जो अकेले ही खेल के परिणामों की दिशा मोड़ सकता था ।

        कपिल देव ने ‘बाई गॉड्स डिक्री’ इस नाम से अपनी आत्मकथन लिखी. विश्व में जाने-माने आलराउंडर के क्रिकेट जीवन की शुरुआत उस समय हुई, जब 16 सेक्टर की टीम में एक खिलाड़ी कम हो गया था. किसी को क्या पता था की खानापूर्ति के लिए जिसे टीम में लिया जा रहा है, वह कपिल क्रिकेट के विश्वमंच पर दिन सबसे कम समय में 100 विकेटें लेने वाला खिलाड़ी ही नहीं बनेगा, चमत्कारिक रूप से 129 टेस्ट मैचों में 5,226 रन और 431 विकटें लेने जैसी उपलब्धियों को हासिल करने वाला पहला भारतीय आलराउंडर होगा.

        भारतीय क्रिकेट टीम को सन 1983 में एक दिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय क्रिकेट श्रुंखला में विश्वविजेता बनाने का श्रेय कपिलदेव को है. विश्वकप में उनके व्दारा बनाने गये 175 रनों की ऐतिहासिक पारी क्रिकेट जगत में स्वर्णित अक्षरों में अंकित हो गयी है. 1987 के वर्ल्ड कप में सच्ची खेलभावना के लिए कपिल देव को हमेशा याद रखा जाता है। 1987 के वर्ल्ड कप में पहला मैच ऑस्ट्रेलिया और इंडिया के बीच में हुआ था।  जिसमें ऑस्ट्रेलिया ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 268 रन बनाए थे, लेकिन ऑस्ट्रेलिया की बैटिंग खत्म होने के बाद कपिल देव ने अंपायरों के साथ बातचीत की जिसके बाद ऑस्ट्रेलिया को दो रन और दिए गए।

        कपिल देव ने अंपायरों को बताया कि मैच के दौरान एक सिक्स लगा था जिसे उन्होंने फोर दिया था। इस सबके चलते अब इंडिया को जीतने के लिए 269 की जगह 271 रन का टारगेट मिला। किस्मत को खेल भी कुछ ऐसा हुआ कि इंडिया की टीम केवल 269 रन ही बना पाई और 1 रन से मैच हार गई। कपिल देव की इस सच्ची खेलभावना के चलते मैच का नतीजा बिल्कुल बदल गया था। विज्डन क्रिकेटर एल्मनैक में भी इस बारे में बताया गया है। 

        अपने इस फैसले के चलते कपिल देव को कप्तानी से हटा दिया गया और वह कभी दोबारा टीम के कप्तान नहीं बने। कप्तान के तौर पर उनका बुरा समय भी रहा जब गावसकर के साथ झगड़े की बात सामनें आई और बॉलर के तौर पर उनका प्रर्दशन खराब हुआ। (इसी साल कपिल देव ने अपने घुटने की सर्जरी करवाई थी जिससे उनकी बॉलिंग स्पीड में भी कमी आई थी। )

सेवानिवृत्ति के पशचात :

        कपिल देव ने १९९४ मे अन्तर-राष्ट्रीय क्रिकेट को अल्विदा कह दिया। १९९९ मे उन्हे भारतीय क्रिकेट टीम का कोच चुना गया। उन्की अवधि के दौरान भारत का प्रदर्शन खास न रहा जिस्मे वे केवल एक टेस्ट मैच जीते और औसट्रेलिया और साउथ अफ्रीका के विरुध दो बडी सीरीज़ हारे। मनोज प्रभाकर द्वारा सट्टेबाज़ी मे फसाये जाने के बाद उन्होने अपने कोच के पद को त्याग दिया। २००५ मे उन्होने खुशी नामक एक राष्ट्रीय सरकारी संगठन की स्थाप्ना की। अभी वे उसके अध्यक्ष है। खुशी दिल्ली मे कम विशेषाधिकृत बच्चो के लिये तीन विद्यालय चलाती है। २४ सितम्बर २००८ को उन्होने भार्तीय प्रादेशिक सेना मे भाग लिया और उन्हे लेफ्टिनेंट कर्नल के रूप मे चुना गया।

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रोहित शर्मा जीवनी - Biography of Rohit Sharma in Hindi Jivani

   रोहित शर्मा का जन्म बनसोद, नागपुर, महाराष्ट्र के ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनकी माता पुर्णिमा शर्मा विशाखापट्नम से थी, इस कारण वे तेलुगू भाषा भी जानते हैं। उनके पिता गुरुनाथ शर्मा एक ट्रांसपोर्ट फर्म स्टोरहाऊस में Caretaker का काम करते थे। पर इतना इनकम नहीं होता थी कि घर के खर्च के साथ उनकी पढ़ाई-लिखाई का भी खर्च उठा सके। इसलिए बचपन में रोहित शर्मा अपने Grandparents और Uncle के साथ बोरीवली में रहते थे। Weekend पर वे अपने पैरेंट्स से मिलने के लिए जाया करते थे, जो डोमविबली में एक सिंगल रूम घर में रहते थे। उनका एक छोटा भाई भी है। विशाल शर्मा, जो मम्मी-पापा के साथ ही रहते थे।

        रोहित शर्मा बचपन से ही क्रिकेट के सोखिया प्राणी थे। टीवी पर आनेवाले किसी भी मैच को मिस नहीं करते थे और वे गली क्रिकेट में भी अच्छे थे। इस कारण वे अपने बिल्डिंग में विख्यात थे, क्योंकि उन्हें लोग मैच खेलने के लिए बुलाया करते थे। कुख्यात भी थे, क्योंकि वे लोगों के घरों के विंडोज की काँच को अपने शॉट से तोड़ दिया करते थे। एक बार तो इस बात को लेकर पुलिस कमप्लेन भी हुआ था। बरहाल, क्रिकेट के आशिक, Rohit Sharma ने 1999 में अपने Uncle के पैसों से एक Cricket Camp को जॉइन कर लिया। वहाँ के कोच दिनेश लाड़ ने उन्हें स्कूल चेंज कर Swami Vivekanand International School में जाने को कहा, जहां वे खुद कोच थे और बेहतर क्रिकेट फेसिलिटीज़ भी मौजूद थी

        उन्होंने 20 साल की उम्र में अपने अंतर्राष्ट्रीय करियर की शुरुवात की थी, जल्द ही विश्लेषको ने रोहित के बल्लेबाजी के हुनर को देख लिया तो और कुछ ही समय बाद उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल कर लिया गया था| 23 जून 2007 को उन्होंने आयरलैंड के खिलाफ एकदिवसीय मैच में पर्दापण किया था| 2013 में भारतीय एकदिवसीय टीम के वे ओपनिंग बल्लेबाज बने और तब से लेकर आज तक वे ओपनिंग बल्लेबाज के रूप में प्रदर्शन कर रहे है|

        नवम्बर 2013 को कोलकाता के ईडन गार्डन पर अपने पहले दो टेस्ट मैच में उन्होंने वेस्ट इंडीज के खिलाफ एक के बाद एक 2 शतक लगाये, ईडन गार्डन पर उन्होंने 177 की पारी खेली थी और दुसरे टेस्ट में वानखेड़े स्टेडियम पर नाबाद 111 रनों की पारी खेली थी| अपना पहला टेस्ट खेलने से पहले वे 108 एकदिवसीय मैच खेल चुके थे|

        अपने अंकल के पैसो से शर्मा ने 1999 में क्रिकेट कैंप ज्वाइन (Join) किया था| कैंप में उनके कोच दिनेश लड़ थे जिन्होंने रोहित को अपना स्कूल बदलकर स्वामी विवेकानंद इंटरनेशनल स्कूल में आने को कहा था, जहा लड़ कोच थे और वहा क्रिकेट खेलने की सभी सुविधाए भी उपलब्ध करवाई जाती थी| शर्मा ने कैंप में ऑफ स्पिनर के रूप में अभ्यास करना शुरू किया था और कभी-कभी ही वे बल्लेबाजी का अभ्यास करते थे, लेकिन लड़ ने शर्मा में गेंदबाजी से ज्यादा बल्लेबाजी में हुनर देखे और लड़ उन्हें बल्लेबाजी करने आठवे पायदान पर भेजते थे|

स्कूल के दिनों में हुआ था पहला प्यार :

        रितिका से पहले रोहित का नाम कई लड़कियों के साथ जुड़ चुका है। वर्ल्ड कप 2015 के दौरान भी रोहित ऑस्ट्रेलिया में एक लड़की के साथ घूमते देखे गए थे। हालांकि, ये स्पष्ट नहीं था कि वो कौन हैं। पहली बार रोहित स्कूल के दिनों में एक लड़की को दिल दे बैठे थे। मुंबई के बोरिवली के स्वामी विवेकानंद इंटरनेशनल स्कूल से पढ़े रोहित ने 11वीं क्लास में एक लड़की को प्रपोज किया था। ये रिलेशनशिप करीब 2 साल तक चला। दो साल बाद उनकी गर्लफ्रेंड ने ही ये रिश्ता खत्म करने का फैसला लिया था।

ब्रिटिश मॉडल से भी जुड़ा नाम :

        क्रिकेट में आगे बढ़ने और स्टार प्लेयर बनने के बाद रोहित का नाम ब्रिटिश मॉडल और एक्ट्रेस सोफिया हयात से भी जुड़ा। नवंबर 2014 में रोहित द्वारा वनडे में दूसरी बार डबल सेन्चुरी मारने के बाद सोफिया ने रोहित को डेडिकेट करते हुए अपनी न्यूड फोटो भी ट्विटर पर शेयर की थी। हालांकि, इस रिलेशनशिप पर दोनों की तरफ से कभी कोई स्टेटमेंट नहीं आया।
समर कैम्प में सामने आया था टैलेंट

        रोहित शर्मा मूलतः आंध्रप्रदेश से हैं। उनका जन्म एक तेलुगु परिवार में हुआ है। वो बचपन से ही पढ़ाई में तेज थे और क्रिकेट खेलने के शौकीन भी। उनके टैलेंट की पहचान स्कूल के क्रिकेट कोच दिनेश लाड ने एक समर कैम्प के दौरान की थी। स्कूल क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन करने के बाद ही उन्हें मुंबई की अंडर 20 टीम में खेलने का मौका मिला था।

निजी जीवन :

        अप्रैल २०१५ में रोहित शर्मा ने अपने बचपन की दोस्त रीतिका सजदे से सगाई की थी और बाद में १३ दिसम्बर २०१५ को दोनों ने शादी करली।

इंडियन प्रीमियर लीग :

        रोहित शर्मा इंडियन प्रीमियर लीग में सफल खिलाड़ियों में से एक है और ये अन्तिम गेंद पर छक्के से जीताने में काफी क्षमता रखते है। अब तक इनके नाम आईपीएल में एक शतक और एक तिकड़ी भी है। रोहित शर्मा ने पहली बार २००८ आईपीएल में ७५०,००० यूएस डॉलर के लिए डेक्कन चार्जर्स के लिए हस्ताक्षर किया था। ये २००८ इंडियन प्रीमियर लीग में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों में से एक थे जिन्होंने ३६.७२ की औसत से कुल ४०४ रन बनाए थे। इस कारण इनको २००८ आईपीएल में कुछ मैचों में ऑरेन्ज कैप पहनने का मौका भी मिला था।

        रोहित शर्मा जब २०११ इंडियन प्रीमियर लीग में रिकी पोंटिंग ने आईपीएल से संन्यास लिया था तब से मुम्बई इंडियन्स टीम के कप्तान है और आईपीएल के शीर्ष तीन कप्तानों में गिने जाते है। रोहित २००८ से २०१० तक डेक्कन चार्जर्स के लिए खेले थे जबकि २०११ से अब तक मुम्बई इंडियन्स के लिए खेल रहे है जिसमें दो बार २०१३ और २०१५ में टीम को विजेता भी बनाया है। इनके अलावा रोहित की कप्तानी में मुम्बई दो बार चैंपियंस लीग टी२० भी जीतने में कामयाब रहा है पहली बार २०११ तथा दूसरी बार २०१३ में।

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सुनील गावस्कर जीवनी - Biography of Sunil Gavaskar in Hindi Jivani

  सुनील गावस्कर भारत के क्रिकेट के पूर्व-खिलाड़ी हैं। सुनील गावस्कर वर्तमान युग में क्रिकेट के महान बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। इन्होंने बल्लेबाजी से संबंधित कई कीर्तिमान स्थापित किए। सनी का जन्म 10 जुलाई 1949 को मुम्बई (महाराष्ट्र) में हुआ था। उनकी पत्नी का नाम मार्शनील है। इनके पुत्र रोहन गावस्कर भी भारतीय क्रिकेट टीम में खेल चुके हैं।

        इन्होंने बल्लेबाज़ी से संबंधित कई कीर्तिमान स्थापित किए। गावस्कर (अपने समय काल में) ने विश्व क्रिकेट में 3 बार, एक वर्ष में एक हज़ार रन, सर्वाधिक शतक (34), सर्वाधिक रन (नौ हज़ार से अधिक), सर्वाधिक शतकीय भागेदारियाँ एवं प्रथम श्रृंखला में सर्वाधिक रन बनाने वाले एकमात्र बल्लेबाज थे। 'सनी' गावस्कर की हर पारी एवं रन ऐतिहासिक होते हैं। उन्होंने भारतीय टीम का कुशल नेतृत्व किया और कई महत्त्वपूर्ण विजयें प्राप्त कीं, जिनमें 'एशिया कप' एवं 'बेसन एंण्ड हेजेस विश्वकप' (BENSON & HAZES WORLD CUP) प्रमुख है।

         'क्रिकेट के आभूषण' कहे जाने वाले गावस्कर ने एक दिवसीय मैचों में भी अपनी टीम के लिए ठोस आधार प्रस्तुत किया है। वे 100 कैंचों का कीर्तिमान भी इंग्लैंड में बना चुके हैं। गावस्कर क्रिकेट की एक अद्वितीय पहेली हैं। 1986 में उनके खेल जीवन का उत्तरार्द्ध होने के बाद भी उनके खेल में और निखार आया। अपने कॉलेज की ओर से क्रिकेट खेलते समय भी वे सबसे सफल बल्लेबाज माने जाते थे। 1971 में उन्हें टैस्ट टीम के वेस्टइंडीज दौरे के लिए चुना गया था। सनी को विश्व का सर्वोपरी खिलाड़ी माना जाता है।

        1975 का पहला वर्ल्डकप गावस्कर ही क्या भारत के क्रिकेटप्रेमी कभी नहीं भूल पाएँगे। उस वर्ल्डकप का जिक्र आते ही नजरों के सामने गावस्कर की नाबाद 36 रन की पारी कौंध जाती है जो उन्होंने पूरे 60 ओवर में खेली  थी। इसके लिए उन्होंने 174 गेंदों का सामना किया था और सिर्फ एक चौका लगाया था।

        इंग्लैंड ने 60 ओवर में चार विकेट पर 334 रन का विशाल स्कोर बनाया था, जिसके जवाब में गावस्कर की अति धीमी बल्लेबाजी के कारण भारत तीन विकेट पर 132 रन ही बना पाया था  । गावस्कर की इस धीमी बल्लेबाजी के लिए तरह-तरह की चर्चाएँ होती थीं। कहा जाता था कि श्रीनिवास वेंकटराघवन को वर्ल्डकप में कप्तानी देने से नाराज गावस्कर ने ऐसी पारी खेली थी।  
  
        हालाँकि खुद गावस्कर का कहना था कि उन्होंने कई बार अपना विकेट खुला छोड़ा मगर विपक्षी गेंदबाजों ने उन्हें आउट नहीं किया। उन्होंने बाद में दावा किया था कि वह खुद को खेल की गति से एडजस्ट नहीं कर पा रहे । गावस्कर मैदान में एक के बाद एक गेंदें बर्बाद कर रहे थे और भारतीय समर्थकों और टीम साथियों की हताशा का अंदाजा लगाना वाकई मुश्किल काम था। सुनील गावस्कर की शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल तथा सेंट जेवियर्स कालेज में हुई । उन्होंने क्रिकेट की शिक्षा ‘गिल्स’ तथा ‘हैरिस’ शील्ड टूर्नामेंट के लिए खेलते हुए प्राप्त की ।

        उन्होंने पश्चिमी जोन के लिए खेलते हुए अखिल भारतीय स्कूल टूर्नामेंटो में बहुत अच्छा स्कोर बनाया । उनके अच्छे प्रदर्शन के लिए उन्हें जे. सी. मुखर्जी मेमोरियल पुरस्कार प्रदान किया गया । उसके पश्चात् सेंट जेवियर्स कालेज में पढ़ते हुए भी उन्होंने ”इंटर यूनीवर्सिटी क्रिकेट” में उत्तम सफलता प्राप्त की । उन्होंने दादर संघ में शामिल होकर विज्जी ट्राफी के लिए खेला और उन्हें बम्बई टीम में आने के लिए न्यौता मिल गया । जिसमें उन्होंने ईरानी ट्राफी व रणजी ट्राफी के लिए खेला ।

        सुनील गावस्कर ने अनेक नए रिकार्ड बनाए तथा पुराने रिकार्ड तोड़े । उन्होंने सर्वाधिक 34 शतक बनाने का रिकार्ड बनाया तथा टेस्ट क्रिकेट में 10000 रन बनाने वाले विश्व के प्रथम खिलाड़ी बने । बाद में एलन बार्डर ने उनका रिकार्ड तोड़ा ।
सुनील गावस्कर आज तक एकमात्र ऐसे खिलाड़ी हैं जिन्होंने एक कैलेंडर वर्ष में एक हजार रन बनाए और यह करिश्मा उन्होंने चार बार कर दिखाया ।

        कुल एक वर्ष (12 माह) में 1984 रन बनाने का रिकार्ड भी सुनील गावस्कर के नाम है । उन्होंने 17 अक्टूबर 1978 से 13 अक्टूबर 1979 के बीच दो द्विशतक, 6 शतक, 9 अर्धशतक लगाकर 1984 रन बनाने का अभूतपूर्व रिकार्ड बनाया ।
अपने कॉलेज के दिनों से ही सुनील गावस्कर एक अच्छे क्रिकेटर की तोर पर देखने को मिलते थे, तभी से कॉलेज में उनकी क्रिकेट खेलने की स्टाइल को सब पसंद करने लगे थे। वे सबसे सफल बल्लेबाज माने जाते थे।

        1971 में उन्हें वेस्टइंडीज के ऐतिहासिक दौरे के लिए टैस्ट टीम में चुना गया था। वे अकेले ऐसे भारतीय खिलाड़ी हैं जिन्होंने वेस्टइंडीज के विरुद्ध 27 टैस्टों में 2749 रन, इंग्लैंड के विरुद्ध 38 टैस्टों में 2483 रन, पाकिस्तान के विरुद्ध 24 टैस्टों में 2089 रन और आस्ट्रेलिया के विरुद्ध 20 टैस्टों में 1550 रन बनाये।

        क्रिकेट के मैदान में अपने अदभुत प्रदर्शन और रिकॉर्ड तोड़ने के कारण वे विश्व के श्रेष्ठ बल्लेबाजों में से एक हैं। उन्होंने 34 शतक बनाकर डॉन ब्रेडमेन का रिकॉर्ड तोड़ा। उन्होंने 10,000 रन बनाये, जो किसी बल्लेबाज व्दारा बनाये गए सबसे ज्यादा रन हैं। सुनील विश्व के अकेले ऐसे बल्लेबाज हैं, जिन्होंने एक क्रिकेट-वर्ष में तीन बार 1000 रन बनाये। उनके कुशल नेतृत्व में भारतीय क्रिकेट टीम ने कई महत्वपूर्ण विजयें प्राप्त कीं जिनमें से ‘एशियाकप’ व ‘बेन्सन एंड हेजेस विश्वकप’ प्रमुख हैं। उन्होंने 125 टेस्ट मैच खेले।

रोचक तथ्य :

1. सुनील गावस्कर के बारे में एक आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि वह अपने शरीर (कद 5 फ़ुट 5 इंच, वज़न 66 किलो) की ठीक-ठाक रखने के लिए क्रिकेट के मैदान से सीधे बैडमिंटन के मैदान में पहुँच जाते हैं।
2. पुस्तकें पढ़ने और संगीत सुनने का उन्हें बहुत ही शौक़ है। उन्होंने स्वयं भी 'सनी डेज़' नामक एक पुस्तक लिखी है और हमेशा लोगों से क्रिकेट की शब्दावली में बात करते हैं।
3. कहते हैं कि एक बार वह अपनी कार में कहीं पर जा रहे थे उनकी कार के आगे एक आदमी आ गया। उन्होंने ब्रैक लगाया और कार से उतरकर उस आदमी के पास गए और बोले–"अरे भाई, देखकर चला करो, नहीं तो रन आउट हो जाओगे।" उस आदमी को यह पहचानने में ज़रा भी देर नहीं लगी कि यह तो सुनील गावस्कर है।
4. गावस्कर विश्व क्रिकेट में 10,000 रन और 30 शतक करने वाले पहले बल्लेबाज़ थे।

अवार्ड्स  :

1. 1975 में ‘अर्जून’पुरस्कार.
2. 1980 में ‘पदमभूषण’ और
3. 1980 में ‘विस्डेन’ पुरस्कार.

किताबे  :

1. ‘सनिडेज’,
2. ‘आइडल्स’,
3. ‘रन्स एंड रुइन्स’,
4. ‘वन डे वन्डर’.

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राहुल द्रविड़ जीवनी - Biography of Rahul Dravid in Hindi Jivani

   राहुल शरद द्रविड़  भारतीय राष्ट्रीय टीम के सबसे अनुभवी क्रिकेटरों में से एक हैं, 1996 से वे इसके नियमित सदस्य रहें हैं।अक्टूबर 2005 में वे भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान के रूप में नियुक्त किये गए और सितम्बर 2007 में उन्होंने अपने इस पद से इस्तीफा दे दिया| १६ साल तक भारत का प्रतिनिधित्व करते रहने के बाद उन्होंने वर्ष २०१२ के मार्च में अंतर्राष्ट्रीय और राष्ट्रीय क्रिकेट के सभी फॉर्मैट से सन्यास ले लिया

         द्रविड़ को वर्ष 2000 में पांच विसडेन क्रिकेटरों में से एक के रूप में सम्मानित किया गया।  द्रविड़ को 2004 के उद्घाटन पुरस्कार समारोह में इस वर्ष के आईसीसी प्लेयर और वर्ष के टेस्ट प्लेयर के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। लम्बे समय तक बल्लेबाजी करने की उनकी क्षमता के कारण उन्हें दीवार के रूप में जाना जाता है, द्रविड़ ने क्रिकेट की दुनिया में बहुत से रिकॉर्ड बनाये हैं। द्रविड़ बहुत शांत व्यक्ति है। "दीवार" के रूप में लोकप्रिय द्रविड़ पिच पर लम्बे समय तक टिके रहने के लिए जाने जाते हैं।

        सुनील गावस्कर और सचिन तेंदुलकर के बाद वे तीसरे ऐसे बल्लेबाज हैं जिन्होंने टेस्ट क्रिकेट में दस हज़ार से अधिक रन बनाये हैं, 14 फ़रवरी 2007 को, वे दुनिया के क्रिकेट इतिहास में छठे और भारत में सचिन तेंडुलकर और सौरव गांगुली के बाद तीसरे खिलाड़ी बन गए जब उन्होंने एक दिवसीय अन्तरराष्ट्रीय क्रिकेट में दस हज़ार रन का स्कोर बनाया. राहुल द्रविड़ ऐसे खिलाड़ी हैं जिनके खेल में स्थिरता है, एकाग्रता है और कुशलता है । जब टीम को खिलाड़ी के क्रीज पर टिकने की आवश्यकता हो तो द्रविड़ जम जाते हैं । उन्होंने टीम को बहुत बार कठिन परिस्थितियों से उबारा है ।

        राहुल की योग्यता केवल बल्लेबाजी तक सीमित नहीं है । वह दाहिने हाथ के ऑफ-ब्रेक गेंदबाज भी हैं । वह बहुत अच्छे विकेट-कीपर भी रहे हैं । वह विपरीत परिस्थितियों में भी शान्त आचरण रखते हैं । इसी कारण उन्हें ‘मिस्टर रिलायबल’ भी कहा जाता है । उनका टैस्ट मैच औसत 50 का है । तकनीकी तौर पर राहुल द्रविड़ की बल्लेबाजी अत्यन्त शानदार होती है, जो समय के साथ-साथ बेहतर होती रही है 

        राहुल द्रविड़ को भारत सरकार द्वारा ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया है । 2000 में उन्हें विज्डन द्वारा ‘क्रिकेटर ऑफ द ईयर’ चुना गया । वह यह सम्मान पाने वाले 12वें भारतीय हैं । यह सम्मान उन्हें 1999 में इंग्लैंड में विश्व कप में किए श्रेष्ठ प्रदर्शन के कारण दिया गया। राहुल भारतीय टीम के लिए अति विशिष्ट खिलाड़ी हैं जिन्हें खेलते देखना दर्शक पसंद करते हैं । उनका विवाह नागपुर की डॉक्टर विजेता पेंढारकर से हुआ है |


        खेल में पैसा हो या पैसों का खेल हो? सवाल बहुत उलझ जाता है जब आप यह भूल जाते हैं कि खेल आनंद उठाने की आदमी की वह स्वाभाविक प्रवृत्ति है, जिसका कोई मोल नहीं. अनमोल है वह. आज हम जिसका मोल लगाते हैं, वह खेल नहीं, खेल से बनाया गया वह बाजार है, जो हर चीज की कीमत तो लगाता है, पर मूल्य किसी का भी नहीं जानता. इसलिए टूर द फ्रांस का आर्मस्ट्रांग इतनी जीतों के बाद बताता है कि उसका सारा कमाल उत्तेजक दवाओं के बल पर था.

        टाइगर वुड्स के पतन की जड़ भी राहुल द्रविड़ की बातों में खोजी जा सकती है. अभी फॉर्मूला वन के मालिक एक्लेस्टॉन को 4.4 करोड़ डॉलर की घूस खिलाने के आरोप में पकड़ा गया है. टेनिस की दुनिया की कितनी ही कहानियां हमने सुनी हैं. आईपीएल के साथ क्रिकेट के मैदान में कितने ऐसे लोग उतर आए हैं, जिनका खेल से नहीं, बल्कि उससे होने वाली कमाई से रिश्ता होता है. इस तरह खेल अपनी आत्मा खोते जाते हैं और अंतत: ड्रग्स, फिक्सिंग, बेईमानी, सेक्स और नशे की अंधेरी दुनिया में खो जाते हैं. खेलों के व्यापार का यह भयावह चेहरा है, जिसकी तरफ राहुल द्रविड़ ने हमारा ध्यान खींचा है. हम राहुल के चेहरे में अपना चेहरा खोजें, तो शायद आदमी बनने के करीब पहुंच सकेंगे.

        2003 के वर्ल्ड कप में भारत को फाइनल तक पहुंचाने में द्रविड़ की खास भूमिका रही. उन्होंने मध्यक्रम को बांध कर रखा और शानदार विकेटकीपिंग भी की. वर्ल्ड कप के बाद टीम में क्रांतिकारी बदलाव हुए. सौरव गांगुली से कप्तानी छीन ली गई और द्रविड़ को कप्तान बनाया गया. 2005 से 2007 तक उन्होंने भारत का नेतृत्व किया. इस दौरान भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया में टेस्ट मैच जीतकर सबको दंग किया. लेकिन 2007 वर्ल्ड कप में टीम के खराब प्रदर्शन ने द्रविड़ से कप्तानी छीन ली.

        कप्तानी छिनते के साल भर के भीतर वह वनडे टीम से बाहर हो गए. वनडे में होती अंधाधुंध बल्लेबाजी में द्रविड़ का क्लासिकल खेल ढक सा गया. 'चाहे कैसा ही शॉट मारो, लेकिन रन बनाओ' वाले खेल में राहुल पिछड़ गए. वह टेस्ट क्रिकेटर बना दिए गए लेकिन वहां भी द्रविड़ ने फिर साबित किया कि टेस्ट क्रिकेट में उनसे बेहतरीन कोई बल्लेबाज नहीं हुआ है. वह दीवार बने रहे, फर्क इतना रहा कि दीवार को टेस्ट क्रिकेट के सफेद रंग से रंग दिया गया.

कीर्तिमान :

1. द्रविड तीसरे भारतीय (दुनिया में छठे) हैं जिन्होंने 10,000 से अधिक टेस्ट रन बनाये हैं।
2. उन्होंने सौरव गांगुली की कप्तानी में जीते गए 21 टेस्ट मैचों में भारत के द्वारा बनाये गए कुल रनों का 23 प्रतिशत स्कोर किया है (102.84 के बल्लेबाजी औसत के साथ) यह एक ही कप्तान की कप्तानी में जीते गए मैचों में टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में किसी भी बल्लेबाज के योगदान का उच्चतम प्रतिशत है, जहाँ कप्तान ने 20 से अधिक टेस्ट जीते हैं।
3. वे एकमात्र खिलाड़ी हैं जिसने देश से बाहर टेस्ट खेलने वाले प्रत्येक राष्ट्र के ख़िलाफ़ शतक बनाया है।
4. वे देश से बाहर भारत के लिए किसी भी विकेट के लिए सर्वोच्च साझेदारी में शामिल रहे हैं, ये साझेदारी 2006 में लाहौर में पकिस्तान के ख़िलाफ़ वीरेंद्र सहवाग के साथ बनाये गए, इस साझेदारी में 410 रन बनाये गए।
5. द्रविड उन तीन बल्लेबाजों में से एक हैं जिन्होंने चार लगातार परियों में टेस्ट शतक लगाये।
6. लगातार 7 टेस्ट मैचों में द्रविड ने 50 या अधिक रन बनाये, इस दृष्टि से भारतीय बल्लेबाजों में वे केवल सचिन तेंडुलकर (8) से पीछे हैं।
7. उन्होंने 94 टेस्टों की 150 परियाँ 3 नंबर पर खेली हैं। उन्होंने इस स्थिति में 8000 से अधिक रन बनाए हैं। ये दोनों तथ्य विश्व रिकॉर्ड के रूप में दर्ज हैं।

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नवजोत सिंह सिद्दू जीवनी - Biography of Navjot Singh Sidhu in Hindi Jivani

भारत के पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी और अमृतसर लोक सभा सीट से भारतीय जनता पार्टी के पूर्व सांसद नवजोत सिंह सिद्दू का जन्म 20 अक्टूबर 1963 को पटियाला पंजाब में हुआ.1983 से 1999 तक वे क्रिकेट के एक मंझे हुए खिलाड़ी रहे.1987 के विश्व कप क्रिकेट की भारतीय टीम में शामिल खिलाडियों में नवजोत सिंह सिद्दू भी शामिल थे. क्रिकेट से सन्यास लेने के बाद उन्हें बी.जे.पी. ने लोकसभा का टिकट दिया और वे अमृतसर की लोकसभा सीट से सांसद चुने गये. राजनीति के अलावा सिद्दू ने टेलीविजन के छोटे पर्दे पर टी.वी. कलाकार के रूप में भी अपनी पहचान बनायी है और टी.वी. सीरियल बिग बॉस और कॉमेडी नाईट विथ कपिल से वे बहुत चर्चा में रहे. सिद्दू एक पंजाबी सिक्ख होते हुए भी पूर्ण रूप से शाकाहारी हैं.

        नवजोत सिंह सिद्धू का जन्म भारत में पंजाब प्रान्त के पटियाला जिले में हुआ। 1983 से 1999 तक वे क्रिकेट के मँजे हुए खिलाड़ी रहे; क्रिकेट से सन्यास लेने के पश्चात उन्हें भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा का टिकट दिया। उन्होंने राजनीति में खुलकर हाथ आजमाया और भाजपा के टिकट पर 2004 में अमृतसर की लोकसभा सीट से सांसद चुने गये। उन पर एक व्यक्ति की गैर इरादतन हत्या का आरोप लगाकर मुकदमा चला और अदालत ने उन्हें तीन साल की सजा सुनायी। जिसके बाद उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से तत्काल त्यागपत्र देकर उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर की। उच्चतम न्यायालय द्वारा निचली अदालत की सजा पर रोक लगाने के पश्चात उन्होंने दुबारा उसी सीट से चुनाव लड़ा और सीधे मुकाबले में कांग्रेस प्रत्याशी व पंजाब के वित्त मन्त्री सुरिन्दर सिंगला को 77626 वोटों के भारी अन्तर से हराया।

क्रिकेट कैरियर :

नवजोत सिंह सिद्धू का अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट करियर 1983 से लेकर 1999 तक रहा था | उन्होंने अपना पहला टेस्ट मैच 1983 में वेस्ट इंडीज के खिलाफ अहमदाबाद में खेला था जिसमे उन्होंने केवल 19 रन बनाये थे | अगले मैच  में  भी वो ज्यादा रन नही बना पाए थे | शुरुवाती दो  टेस्ट मैच खेलने के बाद उन्हें टीम से बाहर बैठना पड़ा था | लगभग 5 वर्षो तक क्रिकेट में संघर्ष करने के बाद उनकी किस्मत तब चमकी जब उनको 1987 के वर्ल्ड कप के लिए चुन लिया गया |

1987 के वर्ल्ड कप में नवजोत सिंह सिद्धू ने अपने पहले ही एकदिवसीय मैच में 73 रन की धुआधार पारी खेली लेकिन वो अपनी टीम को ऑस्ट्रेलिया से होने वाली हार से नही बचा पाए | इस मैच के बाद नवजोत सिंह सिद्धू सुर्खियों में आ गये और 1987 वर्ल्ड कप के पांच में चार मैचो में उन्होंने अर्द्धशतक बनाया | अब नवजोत सिंह सिद्धू की दमदार पारियों की बदौलत भारतीय टीम सेमी फाइनल तक तो पहुच गयी थी | अब सेमीफाइनल में भारत का मुकाबला इंग्लैंड से था और इस मैच में नवजोत का बल्ला नही चला और भारत को शिकस्त का सामना करना पड़ा और भारत वर्ल्ड कप की दौड़ से बाहर हो गया |

 राजनीतिक जीवन :

सिद्धू ने भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर अमृतसर लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से 2004 का लोकसभा चुनाव जीता। राजनीति में आने से बहुत समय पूर्व 1988 में सिद्धू को किन्हीं गुरनाम सिंह की इरादतन हत्या के सिलसिले में सह-आरोपी बनाया गया था। उन्हें पटियाला पुलिस ने गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। उन पर आरोप यह था कि उन्होंने गुरनाम सिंह की हत्या में मुख्य आरोपी भूपिन्दर सिंह सिद्धू की सहायता की है जबकि सिद्धू ने इन आरोपों को गलत बताया था। सिद्धू ने कोर्ट में यह दलील दी कि वह इस मामले में पूरी तरह निर्दोष हैं और शिकायतकर्ताओं ने उन्हें झूठा फँसाया है। सिद्धू की इस दलील पर मृतक गुरनाम सिंह के भतीजे जसविन्दर सिंह ने कहा कि वह घटना का प्रत्यक्षदर्शी है और सुप्रीम कोर्ट तक में इसे सिद्ध कर देगा।

जब वे सांसद बन गये तो उनके खिलाफ़ पुराने केस की फ़ाइल खोल दी गयी। दिसम्बर 2006 में अदालत के अन्दर उन पर मुकदमा चलाया गया। उपलब्ध गवाहियों के आधार पर नवजोत सिंह सिद्धू को चलती सड़क पर हुए झगड़े में एक व्यक्ति को घातक चोट पहुँचाकर उसकी गैर इरादतन हत्या के लिये तीन साल कैद की सजा सुनायी गयी। सजा का आदेश होते ही उन्होंने लोकसभा की सदस्यता से जनवरी 2007 में त्यागपत्र देकर उच्चतम न्यायालय में याचिका ठोक दी। उच्चतम न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा दी गयी सजा पर रोक लगाते हुए फरवरी 2007 में सिद्धू को अमृतसर लोकसभा सीट से दोबारा चुनाव लड़ने की इजाजत दे दी।

कमेण्ट्रेटर और टी.वी. कलाकार :

जब भारतीय क्रिकेट टीम 2001 में श्रीलंका के दौरे पर गयी तो सिद्धू ने बतौर कमेण्ट्रेटर निम्बूज स्पोर्टज़ के लिये काम किया। बाद में उन्हें ई.पी.एन.एस. स्टार स्पोर्ट्स ने अपने चैनल पर अनुबन्धित कर लिया और वे "वन लाइनर कॉमेडी" करने लगे। उन्हें इस कार्य से अपार लोकप्रियता भी हासिल हुई। ई.एस.पी.एन. से अलग होने के बाद वे टेन स्पोर्ट्स से जुड़ गये और क्रिकेट समीक्षक के नये रोल में टी.वी. स्क्रीन पर दिखायी देने लगे। अब तो उन्हें कई अन्य भारतीय टी.वी. चैनल भी आमन्त्रित करने लगे हैं। टी.वी. चैनल पर एक अन्य हास्य कार्यक्रम "द ग्रेट इन्डियन लाफ्टर चैलेन्ज" में जज की भूमिका उन्होंने बखूबी निभायी। इसके अतिरिक्त "पंजाबी चक दे" सीरियल में भी उन्हें काम मिला। हाल ही में उन्हें बिग बॉस के छठे एपिसोड में लिया गया जहाँ कुछ समय तक सफलतापूर्वक काम किया।

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